कृष्णा भक्तिन राधा

रंगी मैं तो श्याम रंग में दूजा रंग कोई न चढ़ पाए रे , ये रंग ऐसा चटख रंग है सब रंग फीका पड़ जाए रे । सुन तेरी मुरलिया की धुन सुध-बुध मैं बिसारी रे , नित-नित यमुना तट पर काहे श्याम बंसी बजाए रे । मैं तो तेरी प्रेम पुजारिन फिर काहे मोहे…

मौन स्वीकृति

भरी सभा में जब द्रौपदी का हुआ था चीर- हरण बिलखती द्रौपदी को, दी न किसी ने न्याय की शरण । अंधे राजा की सभा में छाया था सम्पूर्ण अंधकार साहस नहीं था किसी में कर सके अन्याय का प्रतिकार । केवल बोले विदुर जी महाराज त्यागिए पुत्र को आज होगी बड़ी कृपा सब पर…

त्याग

नम आंखों से अपनी पुरानी तस्वीर को निहार रहा था पंकज। आज उसकी पत्नी स्मिता का जन्मदिन है। स्मिता के गुज़रे हुए 13 साल हो गए पर यादें हैं कि मन से जाने का नाम ही नहीं लेती। दीवार पर टंगी यह तस्वीर उन दिनों की है जब पंकज और स्मिता की शादी हुई थी…

अटूट बंधन

बाँधा था जो धागा मेरे ह्रदय ने, तुम्हारे ह्रदय से टूटा नहीं वो कभी भी किसी भी झंझावातों से । कैसे टूट सकता था प्रथम प्रणय का वो बंधन एक-दूजे की रक्षा का लिया जो था हमने वचन । सुलझाया बैठकर धैर्य से वैचारिक मतभेद का प्रकरण देते रहे एक-दूजे को हम ढांढस प्रतिपल,प्रतिक्षण ।…

लौह रूपिणी

सोमवार को लांस नायक संदीप सिंह कश्मीर में मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए। उसने तीन आतंकवादियों को मार गिराया। उनके 5 साल के बेटे ने पार्थिव शरीर को सेल्यूट किया। उनकी मां कुलविंदर कौर ने बेटे के पार्थिव शरीर को कंधा दिया। मेरी रचना समस्त जवानों को, मां एवं देशवासियों को समर्पित है……..एवं श्रृद्धांजलि…….!!…

मीत ना मिला मन का

कभी मिले थे हम,तुम किसी मोड़ पर, हुई थी प्यार की बरसातें, पकड़ कर एक दूजे का हाथ दोनों बहुत दूर तक चले थे। थी आंखों में प्यार की खुमारी, एक नशा सा छाया हुआ था दोनों के दिलों पर। मंजूर नहीं था दोनों को एक-दूजे से, क्षण भर के लिए भी, होना बेखबर। दो…

नेह का सागर

छाई घटा चहुं दिशा घनघोर पवन मचा रहा है शोर , काल का रुप हुआ विकराल धरा पर मनुष्य है बेहाल । निडर घुम रहा चारों ओर श्रृगाल हाथों में उसके आज रक्षा ढाल, सिंह जा छिपा अपने मांद में असमय ग्रहण लगा जैसे चांद में। भयावह रुप धरी आज रजनी तप रही मरू सी,…

हे पूज्य भारती

जब तक गांव गांव में नारी शक्ति स्वर नहीं गूंजेगा, जब तक जनमानस हृदय में नारी श्रद्धा भाव नहीं भरेगा, तब तक है पूज्य भारती प्रगति को कण कण तरसेगा । जब तक शिक्षा का प्रकाश गांव के कोने कोने नहीं फैलेगा, जब तक प्रत्येक मानव हृदय में ज्ञान- द्वीप नहीं जलेगा, तब तक है…

जिगर वाली

बधाई देने वालों का ताता लगा हुआ था। आज शांता की पदोन्नति हो गई थी। एक निजी अस्पताल में 5 सालों से सफाई कर्मचारी का काम कर रही थी वह। उसकी इमानदारी, मेहनत कथा हंसमुख स्वभाव के कारण सब लोग उसे पसंद करते थे। बहुत ही मिलनसार और समय की बहुत पाबंद थी। अस्पताल के…

भीष्म

आकर्षक व्यक्तित्व के थे धनी वीरों के वीर थे वह शूरवीर, धवल हिम सा सरल हृदय श्वेत वस्त्र में झलकता था धीर । ज्ञानियों के ज्ञानी थे महा ज्ञानी विवेक, बुद्धि से व्यक्तित्व था भरपूर, पिता के लिए था अत्यंत श्रद्धा हृदय में जो बनाती थी उनको मानव में सुर । जन्म लिया मां गंगा…